सिंगपुरा में किसानों की मेहनत पर फिर पानी फिरा
बांध का पूरा पानी बहकर मोरेल नदी में समा गया
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Other | 30 Aug 2025
रामगढ़ पचवारा (दौसा)। उपखंड क्षेत्र के गांव सिंगपुरा में ग्रामीणों द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने और सिंचाई की सुविधा बेहतर करने के उद्देश्य से बनाया गया सपनों का बांध एक बार फिर टूट गया। बीती रात करीब एक बजे अचानक बांध की पाल टूट गई और बांध का पूरा पानी बहकर मोरेल नदी में समा गया। इस घटना से ग्रामीणों में भारी निराशा फैल गई है, क्योंकि पिछले वर्ष भी यही बांध टूट गया था।
ग्रामीणों ने लाखों खर्च कर किया था पुनर्निर्माण
पिछले वर्ष बांध टूटने के बाद इस बार ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और लाखों रुपये खर्च कर जेसीबी व ट्रैक्टरों की मदद से बांध को फिर से दुरुस्त किया था। ग्रामीणों का सपना था कि बारिश का पानी रोककर न केवल खेतों की सिंचाई हो सके बल्कि भूजल स्तर भी सुधरे। अच्छी बरसात के कारण बांध पानी से लबालब भर गया और लोगों की उम्मीदें मजबूत हुईं।
पानी की अधिक आवक बनी मुसीबत
लगातार बारिश और नदी-नालों से पानी की अधिक आवक होने से बांध पर दबाव बढ़ गया। टूटने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने 28 पाइप लगाकर पानी की निकासी शुरू की, ताकि दबाव कम किया जा सके। इसके अलावा 8 इंच के 20 अतिरिक्त पाइप भी लगाए गए। इन प्रयासों के बावजूद पानी का दबाव कम नहीं हुआ और रात करीब एक बजे बांध अचानक टूट गया।
पूर्व सरपंच ने बताई वजह
पूर्व सरपंच मांगीलाल सिंगपुरा ने बताया कि बांध में पानी की अधिक आवक होने से दबाव बढ़ गया था। पाइप लगाकर निकासी की व्यवस्था की गई, लेकिन पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि बांध टिक नहीं पाया और अचानक उसकी पाल टूट गई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते अतिरिक्त सुरक्षा दीवार या मजबूत संरचना बनाई जाती तो यह नुकसान नहीं होता।
ग्रामीणों में मायूसी, सरकार से मदद की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि इस बांध से गांव की बड़ी उम्मीदें जुड़ी थीं। इससे न केवल सैकड़ों बीघा भूमि की सिंचाई संभव होती बल्कि भूजल स्तर भी बेहतर होता। बांध टूटने से जहां किसानों को नुकसान हुआ है, वहीं उनकी मेहनत और पैसा भी पानी में बह गया। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस स्थान पर स्थायी और मजबूत बांध का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
ग्रामीणों ने लाखों खर्च कर किया था पुनर्निर्माण
पिछले वर्ष बांध टूटने के बाद इस बार ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और लाखों रुपये खर्च कर जेसीबी व ट्रैक्टरों की मदद से बांध को फिर से दुरुस्त किया था। ग्रामीणों का सपना था कि बारिश का पानी रोककर न केवल खेतों की सिंचाई हो सके बल्कि भूजल स्तर भी सुधरे। अच्छी बरसात के कारण बांध पानी से लबालब भर गया और लोगों की उम्मीदें मजबूत हुईं।
पानी की अधिक आवक बनी मुसीबत
लगातार बारिश और नदी-नालों से पानी की अधिक आवक होने से बांध पर दबाव बढ़ गया। टूटने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने 28 पाइप लगाकर पानी की निकासी शुरू की, ताकि दबाव कम किया जा सके। इसके अलावा 8 इंच के 20 अतिरिक्त पाइप भी लगाए गए। इन प्रयासों के बावजूद पानी का दबाव कम नहीं हुआ और रात करीब एक बजे बांध अचानक टूट गया।
पूर्व सरपंच ने बताई वजह
पूर्व सरपंच मांगीलाल सिंगपुरा ने बताया कि बांध में पानी की अधिक आवक होने से दबाव बढ़ गया था। पाइप लगाकर निकासी की व्यवस्था की गई, लेकिन पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि बांध टिक नहीं पाया और अचानक उसकी पाल टूट गई। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते अतिरिक्त सुरक्षा दीवार या मजबूत संरचना बनाई जाती तो यह नुकसान नहीं होता।
ग्रामीणों में मायूसी, सरकार से मदद की उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि इस बांध से गांव की बड़ी उम्मीदें जुड़ी थीं। इससे न केवल सैकड़ों बीघा भूमि की सिंचाई संभव होती बल्कि भूजल स्तर भी बेहतर होता। बांध टूटने से जहां किसानों को नुकसान हुआ है, वहीं उनकी मेहनत और पैसा भी पानी में बह गया। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस स्थान पर स्थायी और मजबूत बांध का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
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