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राणोली का कच्चा बांध रिसाव से संकट में, सिंगपूरा बांध की पुनरावृत्ति का डर

जल संरक्षण की उम्मीदों पर खतरा मंडराने लगा
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Other | 30 Aug 2025

रामगढ़ पचवारा/राणोली, 30 अगस्त।
सिंगपूरा बांध के रिसाव के बाद अब राणोली में भी जल संरक्षण की उम्मीदों पर खतरा मंडराने लगा है। शनिवार सुबह ग्रामीणों ने राणोली बांध से पानी का रिसाव होते देखा। देखते ही देखते गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग अब यही सवाल पूछ रहे हैं – “क्या राणोली का सपना भी सिंगपूरा की तरह टूट जाएगा?”

ग्रामीणों की पहल: बिना अनुमति बना कच्चा बांध

यहां यह जानना जरूरी है कि राणोली बांध कोई सरकारी परियोजना नहीं है। यह एक कच्चा बांध है, जिसे ग्रामीणों ने अपनी मेहनत और सहयोग से बनाया। नदी में पुलिया के नीचे ट्रैक्टरों द्वारा मिट्टी डालकर अस्थायी तौर पर पानी रोकने की व्यवस्था की गई।
ग्रामीणों ने बताया कि जल संकट से जूझते गांवों में पीने और सिंचाई दोनों के लिए यह प्रयास किया गया था। लेकिन यह बांध न तो तकनीकी जांच से गुजरा, न ही सरकार से इसकी कोई अनुमति ली गई। यही वजह है कि आज रिसाव होने पर ग्रामीण खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

ग्रामीणों की आवाज़
मनराज मीणा, जो रामनगर डेयरी सचिव हैं , बोले
“गांव के लोगों ने खुद मिलकर यह बांध बनाया। अगर अब यह टूट गया तो केवल पानी नहीं बहेगा, हमारी मेहनत और उम्मीदें भी बह जाएंगी।”

क्यों उठाते हैं ग्रामीण ऐसे जोखिम?
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे जल संकट से जूझ रहे हैं। सरकारी स्तर पर बड़ी योजनाओं और पक्के बांधों का वादा तो किया गया, लेकिन काम धरातल पर नहीं उतरा। ऐसे में ग्रामीण मजबूर होकर बिना अनुमति और तकनीकी सहयोग के ही कच्चे बांध बनाने लगे।
इन प्रयासों में भले ही जनसहभागिता और मेहनत है, लेकिन तकनीकी मजबूती नहीं होने के कारण ऐसे बांध बार-बार रिसाव और टूटने के खतरे में रहते हैं।

राणोली बांध का रिसाव एक चेतावनी है कि केवल ग्रामीणों के उत्साह से बनाए गए जल संरक्षण प्रोजेक्ट टिकाऊ नहीं हो सकते। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि ऐसे प्रयासों को सहयोग दें, तकनीकी मदद उपलब्ध कराएं और स्थायी समाधान निकालें। वरना ग्रामीणों की मेहनत और सपने बार-बार चकनाचूर होते रहेंगे।

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